सामग्री पर जाएं सामग्री पर जाएं
क्रिकेट नियम: 10 बदलाव 30 दिन में
लेख अंतर्दृष्टि

क्रिकेट नियम: 10 बदलाव 30 दिन में

24 अक्टूबर 2026
क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए समझने का सबसे आसान तरीका है खेल को चार हिस्सों में देखना: टीम, मैदान, रन और विकेट। क्रिकेट में दो टीमें होती हैं और प्रत्येक टीम सामान्यतः 11 खिलाड़ियों की होती है...

क्रिकेट नियम: 10 बदलाव 30 दिन में

क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए समझने का सबसे आसान तरीका है खेल को चार हिस्सों में देखना: टीम, मैदान, रन और विकेट। क्रिकेट में दो टीमें होती हैं और प्रत्येक टीम सामान्यतः 11 खिलाड़ियों की होती है। बल्लेबाजी करने वाली टीम रन बनाती है, जबकि गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण करने वाली टीम उसे रोकती है। एक ओवर में 6 वैध गेंदें होती हैं; टेस्ट क्रिकेट में 5 दिन तक, वनडे में 50 ओवर और टी20 में 20 ओवर प्रति टीम हो सकते हैं। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के नियमों में नो-बॉल, वाइड, एलबीडब्ल्यू और रन आउट की स्पष्ट परिभाषाएँ दी गई हैं। अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में आईसीसी नियम, तीसरे अंपायर और डीआरएस भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। शुरुआत में स्कोरकार्ड पढ़ना, ओवर गिनना और विकेट के प्रकार पहचानना सीखें; यही आपकी पहली व्यावहारिक प्राथमिकता होनी चाहिए।

Sweet Bonanza 1000 · Free demo

धूप भरे क्रिकेट मैदान में बल्लेबाज क्रीज पर तैयार, गेंदबाज रन-अप लेते हुए और अंपायर ध्यान से देखता हुआ

क्रिकेट देखने का आनंद तब बढ़ता है जब हर अपील, रन और निर्णय का कारण समझ आने लगे। क्षमा कीजिए, शुरुआत में शब्दावली थोड़ी भारी लग सकती है, लेकिन हम इसे धीरे-धीरे खोलेंगे। क्रिकेट प्रेमी पर मैच समीक्षा और खिलाड़ी आंकड़ों के साथ नियमों को इस तरह समझाया जाता है कि आप टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों प्रारूपों का स्कोरकार्ड पढ़ सकें। सबसे पहले यह याद रखें कि टॉस केवल पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी चुनने का अधिकार देता है; इससे जीत तय नहीं होती। शुरुआती क्रिकेट शब्दावली मार्गदर्शिका के साथ नीचे दिए गए उदाहरणों को मिलाकर पढ़ेंगे तो नियम अधिक स्पष्ट होंगे।

आगे बढ़ने से पहले बुनियादी नियमों का संक्षिप्त संदर्भ सुरक्षित रख लें।

और जानें

यदि आप मैदान और खिलाड़ियों को समझना चाहते हैं: पहले आधार पकड़ें

क्रिकेट का मैदान गोल या अंडाकार हो सकता है, लेकिन उसके बीच की 22 गज लंबी पिच खेल का केंद्र होती है। पिच के दोनों सिरों पर बल्लेबाजी क्रीज, गेंदबाजी क्रीज और रिटर्न क्रीज बनी होती हैं। एक समय में बल्लेबाजी टीम के दो खिलाड़ी मैदान पर रहते हैं; स्ट्राइकर गेंद खेलता है और नॉन-स्ट्राइकर दूसरे छोर पर खड़ा रहता है। क्षेत्ररक्षण टीम में विकेटकीपर, गेंदबाज और नौ अन्य क्षेत्ररक्षक होते हैं, हालांकि सीमित ओवर क्रिकेट में क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध अलग-अलग चरणों में लागू हो सकते हैं। आईसीसी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरों का निर्णय खेल की वैधता का अंतिम आधार है, जबकि टीवी अंपायर सीमित परिस्थितियों में समीक्षा करता है। लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड और मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड जैसे ऐतिहासिक मैदानों के आकार अलग हो सकते हैं, पर पिच की लंबाई 22 गज ही रहती है। इसलिए दर्शक को सीमा रेखा देखकर नहीं, पिच और क्रीज देखकर खेल की स्थिति समझनी चाहिए।

मैच की शुरुआत टॉस से होती है और कप्तान परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी या गेंदबाजी चुनता है। टेस्ट क्रिकेट में प्रत्येक टीम को सामान्यतः दो पारियां मिलती हैं; वनडे और टी20 में प्रत्येक टीम को एक पारी मिलती है। पारी तब समाप्त हो सकती है जब सभी विकेट गिर जाएँ, निर्धारित ओवर पूरे हो जाएँ, लक्ष्य हासिल हो जाए या कप्तान पारी घोषित कर दे। टेस्ट में पारी घोषित करना रणनीतिक निर्णय है, जबकि टी20 में ऐसा विकल्प व्यवहार में लगभग अप्रासंगिक रहता है। 2026 में भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और पाकिस्तान जैसे देशों के मैच देखते समय प्रारूप पहचानना जरूरी है, क्योंकि वही ओवर सीमा, क्षेत्ररक्षण और लक्ष्य-गणना बदलता है। Source: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियम और खेल शर्तें。 एक उपयोगी अभ्यास है कि प्रसारण शुरू होते ही प्रारूप, ओवर सीमा और पहली पारी की टीम लिख लें।

रन कैसे बनते हैं और स्कोरकार्ड कैसे पढ़ें?

रन बल्लेबाज के शॉट, दोनों बल्लेबाजों के छोर बदलने, बाउंड्री या अतिरिक्त के माध्यम से बनते हैं। जमीन छूकर सीमा पार गेंद पर 4 रन और बिना जमीन छुए सीमा पार गेंद पर 6 रन मिलते हैं; वाइड, नो-बॉल, बाई और लेग-बाई अतिरिक्त रन कहलाते हैं। स्कोरकार्ड में 87/3 का अर्थ है 87 रन और 3 विकेट, जबकि 12.4 ओवर का अर्थ 12 पूरे ओवर और अगले ओवर की 4 वैध गेंदें हैं।

अब उस बिंदु पर ध्यान दें जिसे शुरुआती दर्शक अक्सर गलत पढ़ते हैं: 12.4 का दशमलव 12.4 ओवर नहीं, बल्कि 12 ओवर और 4 गेंद है। छह गेंदों वाला रूपांतरण लगाकर 12.4 को 12.67 ओवर मानना सांख्यिकीय गलती होगी। इसी तरह 5 वाइड गेंदों का अर्थ ओवर की 5 वैध गेंदें नहीं है; वाइड गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती, इसलिए गेंदबाज को छह वैध गेंदें पूरी करनी होंगी। यह छोटी-सी तकनीकी बात रनरेट, गेंदबाज के आंकड़े और लक्ष्य की गणना पर सीधा असर डालती है।

  • बल्लेबाज के रन: बल्ले से बनाए गए रन।
  • अतिरिक्त रन: वाइड, नो-बॉल, बाई और लेग-बाई।
  • टीम स्कोर: बल्लेबाजों और अतिरिक्त रनों का कुल योग।
  • रनरेट: कुल रन को खेले गए वैध ओवरों से भाग देने पर प्राप्त दर।
  • आवश्यक रनरेट: लक्ष्य तक पहुँचने के लिए बचे ओवरों में चाहिए औसत रन।

यदि आप स्कोरकार्ड पढ़ने में गति चाहते हैं, तो बल्लेबाज के रन, गेंदों की संख्या, स्ट्राइक रेट और गिर चुके विकेट को साथ देखें। विराट कोहली के 60 रन 40 गेंदों पर हों तो स्ट्राइक रेट 150 होगा, लेकिन टीम का स्कोर 110/5 होने पर पारी की उपयोगिता अलग तरह से आंकी जाएगी। इसलिए केवल व्यक्तिगत रन देखकर मैच का निष्कर्ष निकालना सुरक्षित नहीं है। क्रिकेट स्कोरकार्ड पढ़ने की पूरी विधि से बल्लेबाजी साझेदारी, गेंदबाजी आंकड़े और आवश्यक रनरेट को जोड़कर समझें।

मैच के आंकड़ों और नियमों को एक साथ पढ़ना शुरू करने के लिए यह अगला संदर्भ उपयोगी रहेगा।

और जानें

यदि आप विकेट और अंपायर के निर्णय समझना चाहते हैं: आउट के प्रकार सीखें

क्रिकेट में बल्लेबाज कई तरीकों से आउट हो सकता है, लेकिन सबसे सामान्य प्रकार बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू, रन आउट, स्टंप्ड और हिट विकेट हैं। बोल्ड में गेंद विकेटों को गिराती है; कैच में बल्ले से लगी गेंद जमीन छूने से पहले क्षेत्ररक्षक पकड़ता है। एलबीडब्ल्यू में गेंद का बल्लेबाज के पैर या शरीर से संपर्क, विकेट की दिशा, पिचिंग स्थान और शॉट खेलने का प्रयास सभी महत्वपूर्ण होते हैं। रन आउट में बल्लेबाज क्रीज से बाहर रहता है और गेंद से संबंधित विकेट गिरा दी जाती है। स्टंप्ड निर्णय में विकेटकीपर गेंद पकड़कर विकेट गिराता है, जबकि बल्लेबाज रन लेने का प्रयास नहीं कर रहा होता। क्रिकेट कानूनों के आधिकारिक संस्करण के लिए मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के नियम देखें। प्रत्येक आउट के लिए अपील आवश्यक हो सकती है; अंपायर स्वयं हर स्थिति में आउट घोषित नहीं करता।

एलबीडब्ल्यू में असली जाँच क्या होती है?

एलबीडब्ल्यू में अंपायर यह देखता है कि गेंद पहले बल्ले से लगी या नहीं, गेंद विकेटों के सामने शरीर से टकराई या नहीं, पिचिंग और प्रभाव नियमों के भीतर हैं या नहीं, तथा गेंद विकेटों को लगती। केवल पैर पर गेंद लगना एलबीडब्ल्यू नहीं बनाता; ऑफ स्टंप के बाहर पिचिंग, बल्ले से पहले संपर्क और विकेट की ऊँचाई जैसे कारक निर्णय बदल सकते हैं।

एलबीडब्ल्यू को लेकर सबसे उपयोगी व्यावहारिक नियम यह है कि चार सवाल क्रम से पूछें: गेंद कहाँ पिच हुई, पहला संपर्क बल्ले से हुआ या पैड से, प्रभाव विकेटों के सामने था या नहीं, और गेंद विकेटों को लगती या नहीं। डीआरएस में हॉक-आई की गेंद-पथ तकनीक इन बिंदुओं का अनुमान प्रस्तुत करती है, लेकिन निर्णय प्रणाली की सीमा और मैदानी अंपायर का मूल निर्णय भी महत्वपूर्ण रहते हैं। “अंपायर का कॉल” का अर्थ यह नहीं कि तकनीक विफल हुई; इसका अर्थ है कि उपलब्ध अनुमानित क्षेत्र में मूल निर्णय बरकरार रहता है। Source: आईसीसी निर्णय समीक्षा प्रणाली की खेल शर्तें। यही कारण है कि समान दिखने वाली दो एलबीडब्ल्यू अपीलों का परिणाम अलग हो सकता है।

नो-बॉल और वाइड को भी केवल अतिरिक्त रन समझना अधूरा है। नो-बॉल पर सामान्यतः एक अतिरिक्त रन मिलता है और सीमित ओवर प्रारूपों में अगली गेंद फ्री हिट हो सकती है, हालांकि प्रतियोगिता की खेल शर्तें देखना जरूरी है। वाइड गेंद बल्लेबाज की सामान्य पहुँच से बाहर होती है और ओवर में वैध गेंद के रूप में नहीं गिनी जाती। कैच के मामले में क्षेत्ररक्षक का गेंद पर नियंत्रण, सीमा रेखा से संपर्क और कैच पूरा होने का क्रम निर्णायक है। 2017 में आईसीसी ने कैच के नियंत्रण और सीमा से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया था; इसलिए पुरानी टीवी व्याख्याओं पर निर्भर रहना ठीक नहीं। नियमों का यह हिस्सा खास तौर पर उन दर्शकों के लिए महत्वपूर्ण है जो लाइव क्रिकेट में तुरंत निर्णय समझना चाहते हैं।

  • बोल्ड: गेंद विकेटों को गिरा दे।
  • कैच: बल्ले से लगी गेंद जमीन से पहले पकड़ी जाए।
  • एलबीडब्ल्यू: वैध शर्तों में शरीर से रुककर गेंद विकेटों को लगती।
  • रन आउट: क्रीज से बाहर रहते हुए विकेट गिर जाए।
  • स्टंप्ड: विकेटकीपर गेंद से विकेट गिराए और बल्लेबाज क्रीज से बाहर हो।
  • हिट विकेट: बल्लेबाज स्वयं अपने विकेट गिरा दे।

यदि आप टेस्ट, वनडे और टी20 की तुलना कर रहे हैं: प्रारूप के अनुसार नियम बदलें

टेस्ट क्रिकेट में पांच दिन तक खेल, प्रत्येक टीम की दो पारियां और पारी घोषित करने की रणनीति होती है। वनडे में प्रत्येक टीम को 50 ओवर मिलते हैं, जबकि टी20 में 20 ओवर मिलते हैं। इन प्रारूपों का अंतर केवल समय का नहीं है: टेस्ट में धैर्य, वनडे में पारी निर्माण और टी20 में गेंद-दर-गेंद जोखिम अधिक महत्वपूर्ण होता है। उदाहरण के लिए, टेस्ट में बल्लेबाज रक्षात्मक शॉट से लंबे समय तक टिक सकता है, पर टी20 में धीमी शुरुआत से आवश्यक रनरेट तेजी से बढ़ सकता है। भारत का रणजी ट्रॉफी ढाँचा प्रथम श्रेणी क्रिकेट से जुड़ा है, जबकि इंडियन प्रीमियर लीग टी20 प्रारूप का प्रमुख उदाहरण है। प्रारूप पहचानना इसलिए आवश्यक है क्योंकि पावरप्ले, गेंदबाजों की ओवर सीमा और सुपर ओवर जैसी व्यवस्थाएँ प्रतियोगिता के अनुसार बदलती हैं।

पावरप्ले, गेंदबाज और रणनीति कैसे काम करते हैं?

टी20 में सामान्यतः शुरुआती 6 ओवर पावरप्ले होते हैं, जिनमें 30-यार्ड सर्कल के बाहर सीमित संख्या में क्षेत्ररक्षक रखे जा सकते हैं। वनडे में पावरप्ले चरण अलग खेल शर्तों के अनुसार लागू होते हैं, इसलिए दर्शक को केवल टी20 का नियम वनडे पर नहीं लगाना चाहिए। एक गेंदबाज टी20 में अधिकतम 4 ओवर और 50 ओवर के मैच में अधिकतम 10 ओवर कर सकता है। टेस्ट में ऐसी कुल मैच-सीमा नहीं होती, हालांकि लगातार गेंदबाजी, ओवररेट और विश्राम रणनीति को प्रभावित करते हैं। Source: आईसीसी पुरुष क्रिकेट खेल शर्तें। एक कम चर्चित बिंदु यह है कि धीमा ओवररेट केवल समय की समस्या नहीं; मैच रेफरी टीम पर दंड, जुर्माना या प्रतियोगिता-विशिष्ट कार्रवाई लागू कर सकता है।

सुपर ओवर बराबरी की स्थिति में सीमित ओवर क्रिकेट में विजेता तय करने का तरीका है, लेकिन हर प्रतियोगिता की टाई-ब्रेक प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती। कुछ टूर्नामेंटों में लगातार सुपर ओवर हो सकते हैं, जबकि स्थानीय प्रतियोगिता में सीमा या अलग प्रावधान हो सकता है। वर्षा से बाधित वनडे में डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धति लक्ष्य बदल सकती है; इसका उद्देश्य केवल खोए ओवरों के अनुपात में रन घटाना नहीं, बल्कि दोनों टीमों के उपलब्ध संसाधनों का तुलनात्मक मूल्यांकन करना है। टी20 मैच में कम-से-कम कितने ओवर होने चाहिए, यह प्रतियोगिता की शर्तों पर निर्भर कर सकता है। यही वह जगह है जहाँ सामान्य दर्शक की सहज धारणा अक्सर गलत पड़ती है। मौसम, ओवर और विकेट की स्थिति लिखे बिना संशोधित लक्ष्य पर निष्कर्ष न निकालें।

अब नियमों को मैच परिस्थिति में लागू करने के लिए एक छोटी जाँच सूची अपनाएँ।

  1. प्रारूप और कुल ओवर पहचानें।
  2. पावरप्ले की अवधि और क्षेत्ररक्षण सीमा देखें।
  3. गेंदबाज के पूरे किए ओवर गिनें।
  4. बारिश या रुकावट के बाद संशोधित लक्ष्य नोट करें।
  5. टाई होने पर प्रतियोगिता की सुपर ओवर शर्त पढ़ें।

क्रिकेट प्रेमी की मैच समीक्षा पढ़ते समय इन पाँच बिंदुओं को साथ रखें। इससे खिलाड़ी आंकड़ों और रणनीति के बीच संबंध स्पष्ट होगा, खासकर तब जब कोई टीम कम रन बनाकर भी बेहतर गेंदबाजी के कारण मैच जीतती है। टी20 और वनडे रणनीति तुलना उपयोगी है, लेकिन उसे टेस्ट क्रिकेट के धैर्यपूर्ण संदर्भ से अलग पढ़ना चाहिए।

प्रारूपों का अंतर समझ लेने के बाद नियमों की सामान्य भूलें पहचानना आसान हो जाता है।

स्कोरबोर्ड पर टी20 पावरप्ले, ओवर संख्या और आवश्यक रनरेट दिखाता आधुनिक क्रिकेट स्टेडियम

सामान्य गलतियों से कैसे बचें?

क्रिकेट के नियम सीखते समय सबसे आम भूल यह है कि दर्शक हर गेंद को वैध मान लेता है। वाइड और नो-बॉल ओवर की गणना बदलते हैं, बाई और लेग-बाई बल्लेबाज के व्यक्तिगत स्कोर में नहीं जुड़ते, तथा 12.4 ओवर का अर्थ 12 ओवर और 4 गेंद है। दूसरी भूल एलबीडब्ल्यू को केवल पैड पर लगी गेंद मानना है; पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट-पथ की तीनों शर्तें देखनी पड़ती हैं। तीसरी भूल डीआरएस को स्वचालित सुधार प्रणाली समझना है, जबकि समीक्षा उपलब्ध होने, समय पर माँगे जाने और निर्णय समीक्षा के नियम लागू होने आवश्यक हैं। इन गलतियों से बचने के लिए मैच देखते समय हर अपील के साथ गेंद का प्रकार, बल्लेबाज की स्थिति और अंपायर का संकेत नोट करें।

“फ्री हिट” का अर्थ यह नहीं कि बल्लेबाज किसी भी स्थिति में आउट नहीं हो सकता। नो-बॉल के बाद फ्री हिट पर बोल्ड, एलबीडब्ल्यू या सामान्य कैच से आउट नहीं दिया जाता, लेकिन रन आउट, स्टंपिंग के कुछ रूप, हिट विकेट या गेंद को दो बार मारने जैसे प्रावधान अलग हो सकते हैं। इसी तरह बाउंड्री पर कैच में क्षेत्ररक्षक का शरीर सीमा रेखा को छूता है या नहीं, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्रिकेट कानून में गेंद पर नियंत्रण और जमीन से संपर्क का क्रम निर्णायक होता है। एक और कम चर्चित बिंदु यह है कि मृत गेंद घोषित होने के बाद कुछ घटनाओं से रन या विकेट नहीं जुड़ते; अंपायर का संकेत देखकर ही अगली गेंद की स्थिति मानें। यह सावधानी प्रसारण की धीमी गति वाली रिप्ले से अधिक विश्वसनीय आधार देती है।

ध्यान रखने योग्य भूलों की सूची:

  • वाइड को वैध गेंद समझना।
  • अतिरिक्त रन को बल्लेबाज के स्कोर में जोड़ना।
  • एलबीडब्ल्यू में बल्ले और पैड के पहले संपर्क को नजरअंदाज करना।
  • 12.4 ओवर को 12.4 दशमलव ओवर मानना।
  • डीआरएस की समय-सीमा और समीक्षा संख्या भूलना।
  • सुपर ओवर के नियम सभी टूर्नामेंट में समान मानना।
  • अपील और अंपायर के संकेत के बीच अंतर न समझना।

गलती होने पर पूरा नियम-पुस्तक पढ़ना आवश्यक नहीं; पहले संबंधित संकेत पहचानें। अंपायर का हाथ फैलना वाइड, सिर के ऊपर हाथ उठना नो-बॉल और उंगली उठना आउट का संकेत हो सकता है, हालांकि प्रसारण ग्राफिक्स अंतिम संदर्भ नहीं होते। आधिकारिक प्रतियोगिता दस्तावेज, आईसीसी की खेल शर्तें और मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के कानून प्राथमिक स्रोत हैं। सोशल मीडिया की छोटी क्लिप में गेंद से पहले और बाद की घटनाएँ कट सकती हैं, इसलिए उससे कानूनी निष्कर्ष निकालना जोखिमपूर्ण है। यह सावधानी विशेष रूप से एलबीडब्ल्यू, कैच और रन आउट जैसे सीमांत निर्णयों पर लागू होती है।

गलतियों को कम करने के लिए यह त्वरित संदर्भ अपने पास रखें।

और जानें

30 दिनों में नियमों की समझ कैसे जाँचें?

30 दिनों में शुरुआती दर्शक क्रिकेट के मुख्य नियमों में मजबूत आधार बना सकता है, यदि सीखने का क्रम रोजाना 15 से 20 मिनट का हो। पहले सप्ताह में पिच, क्रीज, खिलाड़ी और रन के प्रकार सीखें; दूसरे सप्ताह में आउट होने के छह प्रमुख तरीकों और अतिरिक्त रन पर ध्यान दें। तीसरे सप्ताह में टेस्ट, वनडे और टी20 की तुलना करते हुए कम-से-कम तीन स्कोरकार्ड पढ़ें। चौथे सप्ताह में डीआरएस, पावरप्ले, संशोधित लक्ष्य, सुपर ओवर और ओवररेट जैसी उन्नत स्थितियों की जाँच करें। लक्ष्य हर नियम याद करना नहीं, बल्कि लाइव मैच में सही प्रश्न पूछना है: गेंद वैध थी या नहीं, विकेट क्यों गिरा, और लक्ष्य किस नियम से बदला?

सप्ताह-दर-सप्ताह अभ्यास योजना

पहले सात दिनों में एक टी20 मैच का स्कोरकार्ड चुनें और हर ओवर के बाद कुल रन, विकेट तथा आवश्यक रनरेट लिखें। दिन 8 से 14 तक वाइड, नो-बॉल, बाई और लेग-बाई को अलग-अलग पहचानें; इस अभ्यास में व्यक्तिगत रन और टीम रन का अंतर साफ होगा। दिन 15 से 21 तक किसी टेस्ट या वनडे मैच की साझेदारियाँ, गेंदबाजों के ओवर और क्षेत्ररक्षण चरण नोट करें। अंतिम नौ दिनों में वास्तविक निर्णयों को आधिकारिक कानून से मिलाएँ, खासकर एलबीडब्ल्यू, कैच, रन आउट और डीआरएस मामलों को। हर सप्ताह के अंत में पाँच वाक्यों में मैच का नियम-आधारित सार लिखना बेहतर है, केवल स्कोर याद करना पर्याप्त नहीं।

  • दिन 1–7: पिच, क्रीज, रन और ओवर।
  • दिन 8–14: अतिरिक्त रन और आउट के प्रकार।
  • दिन 15–21: प्रारूप, पावरप्ले और गेंदबाजी सीमाएँ।
  • दिन 22–30: डीआरएस, बारिश, सुपर ओवर और समीक्षा।
  • अंतिम जाँच: बिना सहायता के एक स्कोरकार्ड समझाना।

इस 30-दिवसीय पद्धति का लाभ यह है कि नियम अलग-अलग परिभाषाओं की सूची नहीं रहते, बल्कि मैच की घटनाओं से जुड़ जाते हैं। उदाहरण के लिए, 18वें ओवर में 24 रन चाहिए हों तो आप तुरंत आवश्यक रनरेट निकाल सकते हैं; यदि गेंद नो-बॉल हो तो अतिरिक्त रन और फ्री हिट दोनों का प्रभाव समझ सकते हैं। यदि बारिश के बाद लक्ष्य बदले, तो आप यह भी जाँचेंगे कि कितने ओवर उपलब्ध बचे हैं और किस पद्धति का उल्लेख किया गया है। क्रिकेट आंकड़ों और रनरेट की उन्नत मार्गदर्शिका इस अभ्यास को आगे बढ़ाती है। क्रिकेट प्रेमी पर प्रकाशित खिलाड़ी आंकड़े पढ़ते समय नियम-संदर्भ जोड़ने से आपकी मैच समझ अधिक संतुलित होगी।

30 दिन पूरे होने पर स्वयं से तीन प्रश्न पूछें: क्या आप 12.4 ओवर का सही अर्थ बता सकते हैं, क्या एलबीडब्ल्यू की मुख्य शर्तें क्रम से समझा सकते हैं, और क्या टेस्ट, वनडे तथा टी20 के बीच निर्णायक अंतर बता सकते हैं? यदि उत्तर हाँ है, तो आप शुरुआती स्तर से आगे बढ़ चुके हैं। यदि नहीं, तो दोबारा पूरे लेख पर लौटने के बजाय उसी कमजोर विषय का एक मैच देखकर अभ्यास करें। सुनिए—यही वह हिस्सा है जो मायने रखता है: क्रिकेट नियम रटने से नहीं, निर्णयों को गेंद-दर-गेंद जोड़ने से स्थायी रूप से समझ आते हैं। सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से मैच विश्लेषण करें; किसी भी खेल-संबंधी अनुमान को निश्चित परिणाम न मानें।

अब अपनी सीख को एक संक्षिप्त नियम-सूची से पक्का करें।

और जानें

मुख्य नियमों का त्वरित सार

  • एक ओवर में 6 वैध गेंदें होती हैं।
  • टी20 में सामान्यतः प्रत्येक टीम को 20 ओवर मिलते हैं।
  • वनडे में सामान्यतः प्रत्येक टीम को 50 ओवर मिलते हैं।
  • टेस्ट में प्रत्येक टीम को सामान्यतः दो पारियां मिलती हैं।
  • 4 रन जमीन छूकर सीमा पार करने पर और 6 रन बिना जमीन छुए सीमा पार करने पर मिलते हैं।
  • वाइड और नो-बॉल अतिरिक्त रन देते हैं तथा वैध गेंदों की गणना बदल सकते हैं।
  • एलबीडब्ल्यू में पिचिंग, पहला संपर्क, प्रभाव और विकेट-पथ देखे जाते हैं।
  • डीआरएस अंपायर के निर्णय की सीमित समीक्षा है, स्वतः निर्णयकर्ता नहीं।
  • 12.4 ओवर का अर्थ 12 ओवर और 4 वैध गेंद है।
  • सुपर ओवर और बारिश से जुड़े नियम प्रतियोगिता की खेल शर्तों पर निर्भर कर सकते हैं।

क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए कठिन तभी लगते हैं जब रन, ओवर, विकेट और प्रारूप को अलग-अलग समझा जाए। इन्हें एक ही क्रम में जोड़ने पर मैच की पूरी कहानी स्पष्ट होती है। पहले प्रारूप पहचानें, फिर गेंद की वैधता देखें, उसके बाद रन या विकेट की घटना समझें और अंत में स्कोरकार्ड से पुष्टि करें। यही क्रम टेस्ट क्रिकेट के लंबे सत्र, भारत के वनडे मुकाबले और आईपीएल के तेज टी20 मैच—तीनों पर लागू होता है। क्रिकेट प्रेमी के मैच समीक्षा, खिलाड़ी आंकड़े और बल्लेबाजी-बॉलिंग रणनीति वाले लेखों के साथ इस पद्धति का उपयोग करें; कुछ ही मैचों में आपकी देखने की क्षमता अधिक सटीक हो जाएगी।

यदि आप अगला मैच अधिक समझदारी से पढ़ना चाहते हैं, तो नियमों की इस सूची को साथ रखें।

और जानें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: क्रिकेट में ओवर क्या होता है?

उत्तर: ओवर छह वैध गेंदों का समूह होता है, जिसे एक ही गेंदबाज लगातार फेंकता है। वाइड और नो-बॉल वैध गेंद नहीं मानी जातीं, इसलिए छह वैध गेंदें पूरी करने के लिए गेंदबाज को अतिरिक्त गेंदें फेंकनी पड़ सकती हैं। उदाहरण के लिए, 12.4 ओवर का अर्थ 12 पूरे ओवर और अगले ओवर की 4 वैध गेंदें है। एक गेंदबाज लगातार दो ओवर नहीं फेंक सकता; ओवर समाप्त होने के बाद दूसरा गेंदबाज आता है।

प्रश्न: क्रिकेट में रन कैसे गिने जाते हैं?

उत्तर: रन बल्ले से दौड़कर, बाउंड्री से या अतिरिक्त के रूप में गिने जाते हैं। जमीन छूकर सीमा पार गेंद पर 4 और सीधे सीमा पार गेंद पर 6 रन मिलते हैं। वाइड और नो-बॉल टीम के स्कोर में जुड़ते हैं, लेकिन वे सामान्यतः बल्लेबाज के व्यक्तिगत रन में नहीं जुड़ते। बाई और लेग-बाई भी टीम स्कोर बढ़ाते हैं, जबकि उनका रिकॉर्ड अलग अतिरिक्त श्रेणी में रखा जाता है।

प्रश्न: एलबीडब्ल्यू और बोल्ड में क्या अंतर है?

उत्तर: बोल्ड में गेंद सीधे विकेटों को गिराती है, जबकि एलबीडब्ल्यू में बल्लेबाज का शरीर या पैर गेंद को रोकता है और निर्धारित शर्तों में गेंद विकेटों पर लगती। एलबीडब्ल्यू के लिए यह देखना पड़ता है कि गेंद पहले बल्ले से लगी या नहीं, कहाँ पिच हुई और प्रभाव विकेटों के सामने था या नहीं। बोल्ड में इन अतिरिक्त पिचिंग और प्रभाव शर्तों की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न: टेस्ट, वनडे और टी20 में क्या अंतर है?

उत्तर: टेस्ट में प्रत्येक टीम को सामान्यतः दो पारियां और पांच दिन तक खेलने का अवसर मिलता है, वनडे में प्रत्येक टीम को 50 ओवर और टी20 में 20 ओवर मिलते हैं। टेस्ट रणनीति धैर्य और सत्रों पर आधारित होती है, जबकि टी20 में रनरेट और जोखिम अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। पावरप्ले, गेंदबाज की ओवर सीमा और टाई-ब्रेक प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार बदल सकती है।

प्रश्न: डीआरएस कब लिया जा सकता है?

उत्तर: डीआरएस कप्तान द्वारा निर्धारित समय-सीमा में अंपायर के निर्णय की समीक्षा माँगने पर लिया जा सकता है। समीक्षा की संख्या, उपलब्ध तकनीक और अंपायर-कॉल की प्रक्रिया प्रतियोगिता की खेल शर्तों पर निर्भर करती है। आम तौर पर टीम को तुरंत संकेत देना पड़ता है; देर होने पर समीक्षा अस्वीकार हो सकती है। टीवी अंपायर रीप्ले, गेंद-पथ और संपर्क तकनीक के आधार पर निर्णय की जाँच करता है।

प्रश्न: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?

उत्तर: नो-बॉल अवैध डिलीवरी होती है, जो अक्सर गेंदबाज के पैर या डिलीवरी नियम के उल्लंघन से जुड़ी होती है; वाइड गेंद बल्लेबाज की सामान्य पहुँच से बाहर जाती है। दोनों में टीम को अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद वैध ओवर-गणना में शामिल नहीं होती। सीमित ओवर मैचों में नो-बॉल के बाद फ्री हिट मिल सकती है, जबकि वाइड के बाद सामान्य अगली गेंद आती है।

प्रश्न: क्रिकेट के नियम सीखने में कितना समय लगता है?

उत्तर: मुख्य नियम समझने में 30 दिनों तक रोजाना 15 से 20 मिनट का अभ्यास पर्याप्त हो सकता है। पहले सप्ताह में रन, विकेट और ओवर, दूसरे में अतिरिक्त रन और एलबीडब्ल्यू, तीसरे में प्रारूप तथा चौथे में डीआरएस और संशोधित लक्ष्य पढ़ें। एक वास्तविक स्कोरकार्ड के साथ अभ्यास करने पर केवल परिभाषाएँ पढ़ने की तुलना में सीखना तेज और अधिक टिकाऊ होता है।

#EXPLORE #क्रिकेट प्रेमी #DISCOVER #MORE #INSIGHTS #EXPLORE #क्रिकेट प्रेमी